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स्लिप डिस्क, ऐसे में आपको भी हो सकता है

आज के बिजी लाइफस्टाइल में बढ़ते काम के प्रेशर में लोग अपने स्वस्थ पर काम ही ध्यान देते है जिस कारण कमर दर्द की समस्या से लगभग लोग प्रभावित होते हैं। दरअसल यह समस्या लंबर स्पॉंडलाइटिस से प्रभावित है। कई बार तो यह काफी पीड़ादायक हो जाता है और लोग चलने फिरने में काफी लाचार महसूस करने लगते हैं। अगर आपको ऐसा शुरुआत में ही फील होता है तो यह स्लिप डेस्क के लक्षण हो सकते है. और इन सब को आप अपनी जीवनशैली में सुधार लाकर और व्यायाम आदि कर इसको कण्ट्रोल कर सकते हैं।

यह समस्या स्पाइन के लंबर रीजन में आए कुछ समस्या के कारण होती है। स्पाइन की दो हडि्डयों के बीच डिस्क होता है जो वासर की तरह आपस में जुड़ा होता है। अपनी जगह से हट जाना या दबकर स्पाइनल कार्ड की तरफ निकल जाना ही डिस्क प्रोलैप्स या स्लिप डिस्क कहलाता है। डिस्क के बाहर निकले हिस्से से स्पाइन के नस पर दबाव पड़ता है जो दर्द कारण बनता है। यह तक की कई मरीजों को सर्जरी की भी जरूरत पड़ जाती है। इसलिए सामान्य लोगों को इससे बचने के लिए अपने उठने बैठने के तरीके, काम करने के तरीके का ख्याल रखना चाहिए।

25 से 40 वर्ष की उम्र में डिस्क प्रोलैप्स यानि स्लिप डिस्क की समस्या अधिक होती है। डिस्क प्रोलैप्स का खतरा आमतौर पर भारी वजन उठाने, दुर्घटना के कारण हड्डी में चोट लगाने, कमर झुकाकर काम करने, गलत तरीके से झुककर या लगातार ज्यादा देर तक बैठने , गद्देदार बिछावन पर सोने वालों का ज्यादा होता है। इन सब चीज़ो और अपने उठने बैठने के तरीके को बदल कर आप स्लिप डेस्क से छुटकारा पा सकते है।

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