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क्या सच में गर्मी बढ़ने से कम हो जाएगा कोरोना वायरस का प्रभाव? जानिए यहां

दुनिया के तमाम देशों पर अगर ध्यान से नजर डालें तो उन देशों पर कोरोना का कहर सबसे ज्यादा है जहां का तापमान बहुत नीचे रहा है। जबकि गरीब और कम साधन संपन्न होने के बावजूद भी वे देश जहां गर्मी बहुत अधिक है वहां कोरोनावायरस ने ज्यादा असर नहीं डाला है। अगर इस अंदाज से सोचा जाए तो अप्रैल का महीना भारत के लिए बहुत अच्छा हो सकता है।

अगर सभी देशों के रिकॉर्ड को देखा जाए तो सूडान का औसतन तापमान 52 डिग्री है वहां कोरोनावायरस के सिर्फ तीन मामले सामने आये है। वहीं ओमान का तापमान करीब 50 डिग्री होता है वहां 109 मामले सामने आए हैं और अभी तक किसी की मौत नहीं हुई है। इराक का पारा 48 डिग्री के करीब होता है वहां 382 मामले सामने आए हैं और 36 लोगों की मौत हुई है। सऊदी अरब में तापमान 50 डिग्री के करीब होता है। जहां 1012 मामले सामने आए हैं और 36 लोगों की मौत हुई है।

वहीं ठंडी देश जैसे इटली का तापमान 14 डिग्री सेल्सियस है। जहां कोरोनावायरस से 80000 से ज्यादा मामले सामने आए हैं और 8000 से अधिक मौत हो चुकी है। स्पेन का पारा 4 डिग्री तक लुढ़क गया है वहां 57000 मामले सामने आए हैं और 4365 लोगों की मौत हो चुकी है। फ्रांस में पारा 8 डिग्री पर है वहां 29500 मामले सामने आ चुके हैं। ईरान में पारा 15 डिग्री है जहां पर 29000 से ज्यादा मामले सामने आए हैं। अमेरिका का तापमान 12 डिग्री है जहां से कोरोना से जुड़े 86000 मामले सामने आए हैं।

अगर आज हिंदुस्तान का तापमान देखे तो अभी औसत तापमान 28 डिग्री के करीब है। भारत की इतनी बड़ी आबादी के हिसाब से कोरोना का कहर भारत में बहुत नियंत्रित है। सरकार इसे रोकने के लिए तमाम कोशिशें कर रही है और हम कुछ हद तक इसमें सफल भी रहे हैं।

अभी किसी वैज्ञानिक या डॉक्टर ने कोरोना वायरस पर गर्मी नकारात्मक असर पूरी तरह से स्वीकार नहीं है। यह इत्तेफाक है या क्या? यह तो पता नहीं लेकिन आंकड़ों के हिसाब से गर्म देशों में कोरोना वायरस से जूड़े कम मामले देखने को मिले है। सूरज की तपिश बढ़ रही है। कोरोना से बचने की उम्मीद भी बढ़ रही है। एमआईटी की रिपोर्ट के मुताबिक भारत के लिये बढ़ते तापमान के साथ राहत की उम्मीद की जा सकती है।

बहुत सालों बाद इस बार मार्च में बारिश ने अपना रिकॉर्ड तोड़ा है। 120 साल में मार्च में इस तरह की बारिश नहीं देखी गई थी। बार-बार पश्चिमी विक्षोभ के कारण बारिश होने लगी थी। लेकिन भारत सरकार के द्वारा जारी किए गए 21 दिन के बाद लाकडाउन के बाद जब भारतीय जनता बाहर निकलेगी। तब तापमान बहुत ऊपर हो गया होगा। अनुमान लगाया जा रहा है कि 4 अप्रैल तक दिल्ली समेत पूरे पश्चिम भारत का तापमान 40 डिग्री के आसपास पहुंच जाएगा। कुछ रिसर्च करने वाले वैज्ञानिक और डॉक्टरों का कहना है कि गर्मी बढ़ने से वायरस का खतरा कम हो जायेगा।

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