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यह वर्ष सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों के संदर्भ में ऐतिहासिक रहा है

उच्चतम न्यायालय के 2019 के ऐतिहासिक फैसले, निपटना पड़ा इन याचिकाओं से भी

अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण और फ्रांस के साथ अरबों डॉलर की राफेल लड़ाकू विमान खरीद सौदे का रास्ता साफ करने वाले उच्चतम न्यायालय के 2019 के फैसले ऐतिहासिक रहे। इस साल न्यायालय ने खुद को विवादों में उस वक्त पाया जब भारत के तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगे। बहरहाल, बाद में उन्हें इस मामले में क्लिन चिट मिल गई।

शीर्ष अदालत को केन्द्र सरकार द्वारा एक ऐतिहासिक फैसले में संविधान के अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को समाप्त करने के खिलाफ दायर की कई तमाम याचिकाओं से भी निपटना पड़ा।

बाद में इसे लेकर फारुक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती जैसे नेताओं को हिरासत में भी किया गया। अनुच्छेद 370 समाप्त होने के साथ ही जम्मू-कश्मीर को मिला विशेष दर्जा समाप्त हो गया। केन्द्र ने पूरे राज्य को दो केन्द्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया।

वहीं करेल के सबरीमला मंदिर में रजस्वला महिलाओं के प्रवेश को अनुमति देने वाले अपने 2018 के ऐतिहासिक फैसले पर दायर समीक्षा याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने विभिन्न धर्मों द्वारा महिलाओं के साथ किए जाने वाले भेदभाव के मुद्दे को विस्तार देते हुए मामले को सुनवाई के लिए सात सदस्यीय पीठ के पास भेज दिया।

केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार के लिए एक वक्त सिरदर्द बन गए राफेल लड़ाकू विमान खरीद सौदे पर न्यायालय ने केन्द्र के पक्ष में फैसला दिया।

भारत सरकार और फ्रांस की सरकार के बीच हुए इस सौदे में दसाल्ट एविएशन से 36 पूरी तरह तैयार लड़ाकू विमान खरीदे जा रहे हैं।

पूरे देश में संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के विरोध में हो रहे प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की ज्यादाती आदि को लेकर दायर याचिकाओं को शीर्ष अदालत ने संबंधित उच्च न्यायालयों के पास भेज दिया।

सीएए के तहत धार्मिक आधार पर पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में सताए जाने के बाद भारत आए गैर-मुसलमानों को योग्यता के आधार पर देश की नागरिकता दी जाएगी।

भाजपा के निष्कासित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और पूर्व केन्द्रीय मंत्री स्वामी चिन्मयानंद जैसे राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों को याौन उत्पीड़न के मामलों में अदालती मार झेलनी पड़ी। न्यायालय ने सेंगर से जुड़े उन्नाव बलात्कार मामले की सुनवाई लखनऊ की अदालत से दिल्ली की अदालत में स्थानांतरित करवाई।

दिल्ली की अदालत ने सेंगर को इस मामले में जीवन पर्यंत कैद की सजा सुनाई।

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