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बजट 2019-20: स्‍टार्ट-अप्‍स में निवेश को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजना

केन्‍द्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारामन ने लोकसभा में 2019-20 का केन्‍द्रीय बजट पेश करते हुए अनेक ऐसे कर प्रस्‍तावों की घोषणा की जिनका उद्देश्‍य उन्‍नत प्रौद्योगि‍की वाले उदीयमान उद्योगों और स्‍टार्ट-अप्‍स में निवेश को बढ़ावा देना है। आर्थिक विकास के साथ-साथ ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष योजना का शुभारंभ किया जाएगा जिसके तहत सेमी-कंडक्‍टर फैब्रि‍केशन (एफएबी), सोलर फोटो वोल्टिक सेल, लिथियम स्‍टोरेज बैटरियों, सोलर इलेक्ट्रिक चार्जिंग बुनियादी ढांचागत सुविधाओं, लैपटॉप  और कम्‍प्‍यूटर सर्वर जैसे उदीयमान एवं उन्‍नत प्रौद्योगिकी वाले क्षेत्रों में बड़े विनिर्माण संयंत्रों की स्‍थापना के लिए एक पारदर्शी प्रतिस्‍पर्धी बोली प्रक्रिया के जरिए वैश्विक कंपनियों को आंमत्रित किया जाएगा। इन वैश्विक कंपनियों को आयकर अधिनियम की धारा 35 एडी के तहत निवेश से जुड़ी आयकर छूट के साथ-साथ अन्‍य अप्रत्‍यक्ष कर लाभ दिए जाएंगे।

वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारामन ने अपना प्रथम बजट पेश करते हुए कहा कि तथाकथित ‘एंजल टैक्‍स’ मुद्दे को सुलझाने के लिए अब से शेयर प्रीमियम के मूल्‍यांकन के मामले में स्‍टार्ट-अप्‍स के साथ-साथ उन निवेशकों की कोई जांच नहीं की जाएगी जो अपने रिटर्न में आवश्‍यक घोषणाओं एवं सूचनाओं का उल्‍लेख करते हैं। निवेशक की पहचान के साथ-साथ उसकी धनराशि के स्रोत का पता लगाने के मुद्दे को ‘ई-सत्‍यापन’ की एक समुचित व्‍यवस्‍था स्‍थापित कर सुलझाया जाएगा। इसके साथ ही स्‍टार्ट-अप्‍स द्वारा जुटाई गई धनराशि की किसी भी तरह की जांच आयकर विभाग द्वारा कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

स्‍टार्ट-अप्‍स के लंबित आकलन और उनकी शिकायतों के निवारण के लिए सीबीडीटी द्वारा विशेष प्रशासनिक व्‍यवस्‍थाएं की जाएंगी। इस तरह के मामलों में कर-निर्धारण अधिकारी के सुपरवाइजर अधिकारी की मंजूरी मिले बगैर कोई भी जांच अथवा सत्‍यापन नहीं कराया जा सकता है। स्‍टार्ट-अप्‍स के लिए यह आवश्‍यक नहीं होगा कि वे श्रेणी-II के वैकल्पिक निवेश फंडों को भी जारी किए गए अपने शेयरों के बाजार मूल्‍य को जायज ठहराए। इन फंडों को जारी किए गए शेयरों का मूल्‍यांकन आयकर जांच के दायरे से बाहर होगा। वित्त मंत्री ने कहा कि स्‍टार्ट-अप्‍स के मामले में नुकसान को आगे ले जाने और समायोजित करने के लिए कुछ शर्तों में ढील देने का भी प्रस्‍ताव है। इसके अलावा, स्‍टार्ट-अप्‍स में निवेश के लिए आवासीय मकान की बिक्री से प्राप्‍त पूंजीगत लाभ की छूट की अवधि को 31 मार्च, 2021 तक बढ़ाने का प्रस्‍ताव है।

केन्‍द्रीय बजट 2019-20 की खास बातें

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