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आखिर क्यों बिकने के कगार पर पहुंची रिलायंस कम्युनिकेशन ?

देश भर में 15 पैसे में देश की सबसे सस्ती मोबाइल सेवा को शुरू करने वाली अनिल अंबानी की कंपनी रिलांयस कम्यूनिकेशन ने कंपनी को दिवालिया घोषित करने की अर्जी दी है। कंपनी का शेयर 54.3 फीसदी गिरकर 5.30 रुपये पर आ गए थे।

कभी टेलीकॉम में अनिल अंबानी और रिलायंस की तूती बोलती थी। बड़े भाई मुकेश अंबानी से बटवांरे के बाद अनिल के खाते में आरकॉम भी आ गई थी। लोकप्रियता के चरम पर पहुंचने के बाद भी कंपनी की वित्तीय स्थिति डांवाडोल होती गई है।

विभिन्न कर्जदाताओं का बकाया लौटाने में असफल रही कंपनी ने एनसीएलटी में दिवालिया एवं ऋणशोधन अक्षमता कानून (आईबीसी) के तहत फास्ट ट्रैक रिज्योलूशन की गुहार लगाई है। कंपनी ने कहा कि उसके बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने कर्ज निपटान योजना की समीक्षा की और पाया कि 18 संपत्तियों को बेचने की योजना सफल नहीं हो सकी है।

इससे पहले कंपनी ने जियो को स्पेक्ट्रम बेचकर 970 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बनाई थी लेकिन एनसीएलटी ने शर्त रखी कि बची रकम का भुगतान जियो को करना होगा। इसके बाद जियो स्पेक्ट्रम खरीद से पीछे हट गई।

स्वीडन की कंपनी एरिक्सन ने  एनसीएलएटी में अपील की है कि कंपनी उसके 15.8 करोड़ डॉलर के कर्ज में से 7.9 करोड़ का भुगतान नहीं कर सकी है। लिहाजा अनिल अंबानी की निजी संपत्तियों को बेचकर उसका निपटारा किया जाए।

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