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प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना में 6 करोड़ का लक्ष्य हुआ हासिल

उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू ने शिवपार्क, खानपुर दिल्ली की श्रीमती जस्मिना खातून को प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) के तहत 6 करोड़ वां एलपीजी गैस कनेक्शन प्रदान किया। केन्द्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस तथा कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रदान भी इस अवसर पर उपस्थित थे। कई अन्य लाभार्थियों को भी इस योजना के तहत कनेक्शन प्रदान किए गए।

उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन और श्री धर्मेन्द्र प्रधान के मार्गदर्शन की प्रशंसा करते हुए 6 करोड़ के लक्ष्य को हासिल करने में मंत्रालय और तेल विपणन कम्पनियों (ओएमसी) के सामूहिक प्रयासों को सराहा है। इस अवसर को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि पीएमयूवाई समाज की आखिरी पंक्ति में खड़े गरीब लोगों की भलाई के लिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सपनों को पूरा करने का प्रयास है। श्री नायडू ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। पीएमयूवाई जैसी योजनाएं अपनी समग्रता के द्वारा सामाजिक पहलू के विकास की कहानी को आगे बढ़ाती हैं। उन्होंने समय से पहले यह लक्ष्य हासिल करने के लिए सभी हितधारकों को बधाई दी।

पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि एलपीजी की शुरुआत होने के बाद पिछले 50 वर्षों में केवल 13 करोड़ कनेक्शन उपलब्ध कराए गए थे जबकि पिछले 54 महीनों में सरकार ने लगभग इतने ही कनेक्शन उपलब्ध कराए हैं। श्री प्रधान ने कहा कि पीएमयूवाई के तहत लगभग 80 प्रतिशत लाभार्थी अपने सिलेंडरों की रि-फिलिंग करवा रहे हैं। इस योजना की अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और विकसित देशों ने सराहना की है और इसने विकासशील देशों के लिए एक उदाहरण स्थापित किया है।

देश में बीपीएल परिवारों को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने महिलाओं को पांच करोड़ ‘जमा-मुक्त’ एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराने के लिए यह योजना शुरू की थी। 12800 करोड़ के बजटीय आवंटन द्वारा बाद में यह संख्या बढ़कर 8 करोड़ हो गई। पीएमयूवाई के लागू होने से सामान्य रूप से, विशेष रूप से पूर्वोत्तर राज्यों में राष्ट्रीय एलपीजी कवरेज में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी हुई है। इस योजना के परिणामस्वरूप ग्रामीण गरीब परिवार बड़ी संख्या में इस योजना में शामिल हुए है। योजना के 48 प्रतिशत लाभार्थी अनुसूचित जाति एवं जनजातियों के हैं।

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