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मंन्जु सैनी ने भागकर शादी की थी कुमार विश्वास से, अब बनी आरपीएससी सदस्य

आरपीएससी के नियुक्त चार सदस्यों में से सबसे चौकाने वाला नाम मंन्जु शर्मा उर्फ मंन्जु सैनी का है। ये ख्यातिप्राप्त कवि कुमार विश्वास की पत्नी है।

राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी ) की नवनियुक्त सदस्य मंन्जु शर्मा उर्फ मंन्जु सैनी ने अपने घरवालों को स्पस्ट चेतावनी दे दी थी कि उनकी विश्वास कुमार से शादी नही हुई तो वह जहर खाकर अपनी जान दे देगी। अंत मे मंन्जु ने भागकर आज के प्रसिद्ध कवि कुमार विश्वास से शादी कर ली। मंन्जु मूल रूप से अजमेर की रहने वाली है । फिलहाल उनका राजस्थान से कोई ताल्लुक नही है ।

‘कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है।’ इस प्रेम कविता की लाइन से युवाओं के दिलों पर राज करने वाले रॉकस्टार कवि डॉ. कुमार विश्वास आज के दौर में देश के सबसे महंगे कवियों में से एक हैं। कविराज डॉ. कुमार विश्वास ना सिर्फ कविताओं के लिये बल्कि राजनीति पर अपनी बेबाक टिप्पणियों की वजह से भी चर्चा में रहते हैं। यहां मैं उनकी राजनीति या कविता की नहीं बल्कि उनकी पर्सनल लाइफ यानी प्रेम कहानी के बारे में आपको बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में बहुत कम ही लोगों को पता है।

उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के पिलखुवा गांव में 10 फरवरी, 1970 को पैदा हुए कुमार विश्वास की युवाओं में अच्छी खासी लोकप्रियता है। विश्वास दुनिया भर के कवि सम्मेलनों में शिरकत करते रहते हैं। उनके पिता डॉ. चन्द्रपाल शर्मा, आर एस एस डिग्री कॉलेज पिलखुवा में प्रवक्ता थे। उनकी माता रमा शर्मा गृहिणी हैं। कुमार चार भाईयों और एक बहन में सबसे छोटे हैं। बारहवीं उत्तीर्ण होने के बाद उनके पिता उन्हें इंजीनियर बनाना चाहते थे। पिता के कहने पर कुमार ने इंजीनियरिंग में एडमिशन भी करवाया, लेकिन उनका मन टेक्निकल की पढ़ाई में नहीं लगा ।

इंजीनियरिंग छोड़ हिंदी की पढ़ाई करने के बाद साल 1994 में राजस्थान से उन्होंने हिंदी प्रवक्ता के रुप में नौकरी शुरु की । यहीं पर कुमार की पहली मुलाकात मंन्जु सैनी (माली) से हुई, जो उसी कॉलेज में प्रवक्ता थी । यह मुलाकात कब प्यार में बदल गया, दोनों को पता ही नहीं चला। विश्वास ने मंन्जु के लिए कविताएं लिखने की शुरुआत की। यह कविताएं श्रृंगार रस से जुड़ी होती थीं। इन्हीं कविताओं ने मंन्जु को और प्रभावित किया ।

मंन्जु का अजमेर में घर होने से कुमार विश्वास उनसे मुलाकात करने जाते थे। आनासागर झील, बारादरी, फायसागर झील, पुष्कर घाटी और बजरंगगढ़ मंदिर में दोनों ने कई बार मुलाकात की। धीरे-धीरे दोनों का प्यार परवान चढ़ता गया और फिर बात शादी तक पहुंची। कुमार विश्वास को पता था कि जाति अलग होने की वजह से उनके घर में विरोध होगा, इसलिये दोनों ने कुछ दोस्तों की मदद से पहले कोर्ट में और फिर मंदिर में शादी कर ली। शादी के बाद दोनों ने अपने घर वालों को सूचना दी, दोनों परिवारों में इस शादी का विरोध हुआ। कहा जाता है कि शादी के बाद दोनों किराए के मकान पर रहने लगे।

(नोट: इस पोस्ट को वरिष्ठ पत्रकार महेश झालानी जी के फेसबुक वाल से लिया गया है।)

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