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मनुष्य का सुरक्षा कवच है उसका दूसरों के प्रति विश्वास

आश्चर्य की बात है कि बहुत-से ऐसे गुण हैं जो ईश्वर की ओर से हमें उपहार स्वरूप अर्थात नि:शुल्क मिलते हैं जिनके विषय में हम जानकर भी अनजान बने रहना चाहते हैं । इस संसार में रहने वाले हम मनुष्य ऐसे कृतघ्न हैं

जो सदा उनकी अवहेलना करते हैं, उन्हें अपने जीवन में उतारना ही नहीं चाहते। यदि उन्हें अपना लिया जाए तो मानव जीवन का नक्शा ही बदल सकता है।

मनुष्य का सुरक्षा कवच उसका दूसरों के प्रति विश्वास है। परस्पर विश्वास करके ही वह सुखी रह सकता है। हाँ, सावधान रहना बहुत ही आवश्यक है।

किसी पर अन्धविश्वास नहीं करना चाहिए क्योंकि दूसरा व्यक्ति कभी भी विश्वासघात कर सकता है।

दुनिया विश्वास पर ही चलती हैं। करोड़ों का व्यापार इसी विश्वास के भरोसे किया जाता है। यदि मनुष्य हर किसी पर सन्देह करने लगेगा तो पागल हो जाएगा।

तब फिर किसी से भी व्यवहार ही नहीं कर पाएगा। इस तरह से वह समाज से कटकर रह जाएगा जिससे उसका जीना दुश्वार हो जाएगा।

मनुष्य की निश्छल हँसी ही उसकी सबसे बढ़िया औषधि है जो अनेक रोगों की दवा है। सामने वाला कितना भी दुखी क्यों न हो उसका स्वागत यदि निश्छल हँसी से किया जाए तो वह कुछ समय के लिए अपनी परेशानियों को भूल जाता है। वह तरोताजा महसूस करने लगता है।

मनुष्य यदि इन सद् गुणों को अपने जीवन में आत्मसात कर सके तो उसे जीवन निर्वाह करने में सरलता हो सकती है। अपने मार्ग में आने वाली अड़चनों को वह काफी हद तक दूर कर सकता है। इसलिए यथासम्भव अपना हित साधने के लिए इन गुणो को जीवन में ढाल लेना चाहिए।

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