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एक बार फिर सस्ता हो सकता है कर्ज और घटेगी ईएमआई

रिजर्व बैंक र फिर सस्ते कर्ज का उपहार दे सकता है। रिजर्व बैंक बुधवार को चालू वित्त वर्ष की तीसरी द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा में लगातार चौथी बार ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत की कटौती कर सकता है। मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) प्रणाली में नकदी की स्थिति में सुधार और ब्याज दरों में कटौती का लाभ ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए भी कदम उठा सकती है। इस बार बैंकों पर भी ग्राहकों को बड़ी राहत देने का दबाव होगा।

एमपीसी की बैठक 5 से 7 अगस्त तक चलेगी। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजकिरण राय जी ने कहा कि इस समय वृद्धि को प्रोत्साहन देने की जरूरत है। मुझे भरोसा है कि केंद्रीय बैंक दरों में कटौती करेगा। सीआईआई ने कहा कि रिजर्व बैंक को नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में आधा प्रतिशत की कटौती करनी चाहिए। इससे प्रणाली में 60,000 करोड़ रुपये की नकदी उपलब्ध होगी।

वृद्धि दर को प्रोत्साहन के लिए सस्ता कर्ज उपलब्ध कराने की जरूरत है। इससे निवेश बढ़ेगा। मुद्रास्फीति नियंत्रण में है। ऐसे में कटौती का लाभ तेजी से स्थानांतरित किया जाना चाहिए।

सीबीआरई के चेयरमैन एवं सीईओ (भारत, दक्षिण पूर्व एशिया, पश्चिम एशिया और अफ्रीका) अंशुमान मैगजीन ने कहा कि निवेशकों का भरोसा बढ़ने और उपभोक्ता खर्च में इजाफा होने से आर्थिक धारणा अब बेहतर हुई है। उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि रीयल एस्टेट सहित कई उद्योग और क्षेत्र इसी साल उल्लेखनीय रफ्तार पकड़ेंगे। जून की मौद्रिक समीक्षा में रिजर्व बैंक ने लगातार तीसरी बार नीतिगत दर में कटौती की थी।आरबीआई द्वारा लगातार चौथी कटौती के बाद रेपो रेट घटकर 5.50 प्रतिशत पर पहुंच जाएगी। आरबीआई इस बार आम लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए बैंकों पर सख्त रुख  अख्तियार कर सकता है।

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