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जानिए, पपीते के फायदे और इसको उगाने की प्रक्रिया

पपीता एक लोकप्रिय और उपयोगी फल है। यह हेल्थ के लिए भी काफी उपयोगी माना जाता है। आयुर्वेदिक दवाईयोंं के निर्माण में भी पपीता मुख्य रूप से काम आता है।

कच्चे पपीते की सब्जी भी बनाई जा सकती है।

पपीता पाचन प्रक्रिया में सबसे उपयोगी फल माना जाता है।

कच्चे पपीते से दूध भी निकाला जाता है, जिससे पपेइन तैयार किया जाता है।

पपेइन से पाचन संबंधी दवाईयां बनाई जाती हैं पपीता पाचन शक्ति को बढ़ाता है।

इसके पक्के फल का सेवन उदरविकार में लाभदायक होता है।

पपीता सभी हीट यानि उष्ण टेम्परेचर जलवायु वाले प्रदेशों में होता है।

शीघ्र फलनेवाले फलों में पपीता अत्यंत उत्तम फल है।

पेड़ लगाने के बाद वर्ष भर के अंदर ही यह फल देने लगता है।

इसके पेड़ सुगमता से उगाए जा सकते हैं और थोड़े से क्षेत्र में फल के अन्य पेड़ों की अपेक्षा अधिक पेड़ लगते हैं।

इसके पेड़ कोमल होते हैं और तेज ठंड में खराब हो जाते हैं।

ऐसे स्थानों में जहां सर्दियों में पाला पड़ता हो, इसको नहीं लगाना चाहिए।

यह उपजाऊ, दुमट भूमि में अच्छा फलता है। ऐसे स्थानों में जहां पानी भरता हो, पपीता नहीं बढ़ता।

पेड़ के तने के पास यदि पानी भरता है तो इसका तना गलने लगता है।

पपीते के खेत में पानी का निकास अच्छा होना चाहिए।

इसका बीज मार्च से जून तक बोना चाहिए।

पपीते के पेड़ में तीन या चार साल तक ही अच्छे फल लगते हैं।

पपीते के पेड़ नर व मादा दो प्रजातियों के होते हैं।

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