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जानिए, ऑनलाइन गेम्स खतरनाक है, आपके बच्चों के लिए !

आज के दौर में कितनी भी कोशिशें कर लें बच्चों को समझाने की, लेकिन उन्हें अब कार्टून से भी ज़्यादा ऑनलाइन गेम्स में दिलचस्पी है। घर के बाहर जाकर खेलना तो दूर की बात है। यहां तो बच्चे मोबाइल और कंप्यूटर या लैपटॉप पर ही गेम्स खेलने में व्यस्त रहते हैं।

कभी आपने सोचा है कि किस हद तक ये उनके विकास में रोकथाम ले आता है? जी हां! न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक विकास में भी रोक लग जाती है। हर वक़्त स्क्रीन के सामने बैठे रहना और गेम्स की दुनिया में विलीन रहना उनके लिए जितना नुक़सानदायक है, उतनी आपने कल्पना भी नहीं की होगी। इनसे आंखों पर तो नुक़सान होता ही है, लेकिन सबसे ज़्यादा बदलाव उनके व्यवहार और व्यक्तित्व में आ जाता है।

क्या आपके बच्चे बहुत अधिक चिड़चिड़े हो गए हैं? क्या वो अब नरमी से बात नहीं करते या खोये खोये रहते हैं? तो फिर आपका ये फ़र्ज़ बनता है कि उनकी पूरी दिनचर्या पर आपका पूरा ध्यान हो। उनके सोने उठने के वक़्त से लेकर गेम्स खेलने के वक़्त तक।

पहले आप उनका थोड़ा समय अपने साथ बिताने में लगाइये। फिर आहिस्ता-आहिस्ता उनका गेम्स का समय कम कर दीजिए। याद रहे आउटडोर गेम्स से बहतर कुछ नहीं है। यदि आपको बाहर भेजने में परेशानी है तो फिर अभिभावक होने का पूरा फ़र्ज़ निभाते हुए आप उनके साथ अगर खेल भी लें तो इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता है।

इन गेम्स की लत से उनकी पढ़ाई पर भी असर होता है। उनकी याद करने की क्षमता और शांत स्वभाव ने बदलाव आता है। अगर वो हिंसक नहीं भी हो रहे हैं तो ममायूस ज़रूर रहने लगेंगे। ऐसे में आपका फ़र्ज़ बनता है कि बच्चों के बचपन को आप यूं ही व्यर्थ न होने दें और अपना हक़ अदा करें।

कई बार ये देख गया है कि काम करने वाले माता-पिता बच्चों को वक़्त नहीं दे पाते हैं। अतः वे उनको गेम्स के सहारे छोड़ देते हैं। ऐसा करना सिर्फ़ उनके लिए नहीं आपके लिए भी नुक़सानदायक है, क्योंकि उनके बिहेवियर में बदलाव से आपको ही नुक़सान होगा।

आज वैसे भी बाल दिवस है तो आज ही प्राण लीजिये कि स्कूल के बाद बच्चे आपके साथ सबसे ज़्यादा वक़्त गुज़ारेंगे। आपकी देख-रेख में और आपके प्यार में। उनको आज तोहफे़ भी दीजिये और खुद से अच्छे अच्छे वादे भी कीजिये।