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विचारणीय चुनौतियों का सामना कर रहा है भारत का वित्तीय क्षेत्र

इस समय भारत का वित्तीय क्षेत्र कई गंभीर चिंताजनक चुनौतियों का सामना कर रहा है। इसमें उच्च स्तर की गैर-निष्पादित आस्तियां (NPA), कॉरपोरेट बैंलेंस शीट में सुधार की बहुत धीमी प्रक्रिया देश की बैंकिंग प्रणाली के लचीलेपन का पूर्ण परीक्षण कर रही हैं, जो अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के मुताबिक देश की प्रगति में बहुत अधिक बाधा बन रहे हैं।

मुद्रा कोष के कार्यकारी बोर्ड का भारत की वित्तीय प्रणाली की स्थिरता के आकलन (FSSA) पर गंभीरता से विचार-विमर्श करने के बाद उसने एक रिपोर्ट में कहा कि भारत के प्रमुख बैंक बहुत लचीले दिखते हैं, लेकिन इस प्रणाली में कई सारे विचारयोग्य कमजोरियां हैं।

मुद्रा कोष ने यह कहा कि वित्तीय क्षेत्र के सामने कई गंभीर चुनौतियां हैं और आर्थिक वृद्धि हाल में बहुत धीमी हुई है। NPA का उच्च स्तर, कॉरपोरेटों की बैलेंस शीट में धीमा सुधार बैंकों के लचीलेपन का गंभीरता से परीक्षण कर रही हैं और देश में निवेश और वृद्धि की बाधक हैं। इससे पहले भारत के लिए आखिरी बार FSSA को वर्ष 2011 में किया गया था।

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