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आर्थिक समीक्षा: बैंकिंग प्रणाली के कार्य प्रदर्शन में हुआ है सुधार

2018-19 की आर्थिक समीक्षा के अनुसार बैंकिंग प्रणाली के कार्य प्रदर्शन में सुधार हुआ है, क्योंकि गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) अनुपात में कमी आई है और बैंक कर्ज में वृद्धि हुई है। लेकिन अर्थव्यवस्था के लिए वित्तीय प्रवाह बाधित रहा, क्योंकि पूंजी बाजार से उठाई गई इक्विटी वित्त राशि में कमी आई और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) पर दबाव बढ़ा। दिवाला और दिवालिएपन के लिए प्रणालीबद्ध तरीके से व्यवस्था बनाई जा रही है। इस व्यवस्था से बैंकों के फंसे हुए कर्ज की वसूली हुई है और व्यावसायिक संस्कृति में सुधार हुआ है।

आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि 2018-19 के दौरान मौद्रिक वृद्धि दर दीर्घकालिक प्रवृति की ओर बढ़ी। पिछले वित्त वर्ष में प्रचलन में रही मुद्रा में 22.6 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। कुल आरबीआई ऋण में वृद्धि मुख्य रुप से वर्ष के दौरान मुक्त बाजार संचालनों के कारण हुई। बैंकिंग प्रणाली में जमा, मांग और समय दोनों में, वृद्धि हुई। इसके परिणाम स्वरूप 2018-19 में कुल जमा 9.6 प्रतिशत बढ़ा।

आर्थिक समीक्षा में तरलता के विषय में कहा गया है कि 2018-19 के अंतिम दो तिमाहियों तथा 2019-20 की पहली तिमाही में औसत तरलता की स्थिति घाटे में रही। तरलता की कठिनाई ब्याज दरों में भी दिखी। तरलता के मामले में तीन कारणों से स्थिति कठिन हुई। पहला, 2018-19 के अंतिम दो तिमाहियों में बैंक कर्ज वृद्धि में सुधार हुआ, लेकिन बैंक जमाओं में गति धीमी रही। प्रचलित मुद्रा के विकास में भी तेजी आई। महत्वपूर्ण बात यह है कि आरबीआई को विनिमय दर के उतार-चढ़ाव को थामने के लिए 32 बिलियन डॉलर से अधिक की विदेशी मुद्रा सुरक्षित धन से निकालनी पड़ी। आरबीआई ने विभिन्न साधनों के जरिए तरलता लाकर समस्या का समाधान निकाला। वर्ष के दौरान 10 वर्ष के सरकारी प्रतिभूति (जी-सेक) मानक उतार-चढ़ाव भरा रहा।

समीक्षा में कहा गया है कि 2018-19 में बैंकिंग क्षेत्र विशेषकर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कार्य प्रदर्शन में सुधार हुआ। मार्च, 2018 और दिसंबर, 2018 के बीच अनुसूचित वाणिज्य बैंकों का सकल एनपीए अनुपात 11.5 प्रतिशत से घटकर 10.1 प्रतिशत हो गया। पिछले कुछ वर्षों में गैर खाद्य बैंक कर्ज (एनएफसी) के विकास की गति धीमी रही, लेकिन 2018-19 में इसमें सुधार आया। 2018-19 में बड़े उद्योगों तथा सेवा क्षेत्र को बैंकों द्वारा कर्ज देने से समग्र एनएफसी में विकास हुआ। लेकिन ऋण वृद्धि की गति पिछले कुछ महीनों में साधारण रही।

गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को रेटिंग में कमी आने के कारण तथा आईएल और एफएस समूह के दोष के कारण कठिन समय का सामना करना पड़ा। गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की गंभीर तरलता स्थिति को देखते हुए सरकार ने तेजी से कार्रवाई की और समस्या के समाधान के लिए तत्काल कदम उठाया। गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को संसाधनों के प्रवाह की कमी से हाल की तिमाहियों में इस क्षेत्र की ऋण देने की क्षमता पर प्रभाव पड़ा है।

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