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आईडीएफसी फर्स्ट बैंक लिमिटेड के प्रमोटर के रूप में बाहर निकल सकता है आईडीएफसी लिमिटेड

आईडीएफसी बैंक (IDFC Bank) को सन 2014 में बैंकिंग का लाइसेंस रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) से मिला था और आईडीएफसी बैंक (IDFC Bank) की शुरुवात सन 2015 में हुए थी । जब रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने जब आईडीएफसी (IDFC) को बैंकिंग का लाइसेंस दिया था तब आईडीएफसी प्रमोटर को उस शर्त पर दिया था की IDFC प्रमोटर अपना 40 % जीतने हॉल्डिंग को पांच साल के लिए लॉक इन रखेगा । आईडीएफसी का यह लॉक इन पीरियड के 5 साल 2020 में ख़त्म हुआ था । उस बीच आईडीएफसी बैंक लिमिटेड और कैपिटल फर्स्ट के लिमिटेड साथ 2018 विलय हुआ था।

आईडीएफसी (IDFC) ने अपने बयान में कहा की उसे रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) से आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के प्रमोटर के रूप से पर बहार निकलने की परमिशन मिल गयी है। आईडीएफसी ने सूचना दी के उसे RBI की मंजूरी मिल गयी है जो उसने स्टॉक एक्सचेंज को भी जता दिया है। आईडीएफसी की 36. 56 फीसदी होल्डिंग की वैल्यू मौजूदा मार्केट के हिसाब से 11,618 करोड़ मानी जाती है।

आईडीएफसी ने कहा कि आरबीआई ने स्पष्ट किया कि 5 साल की लॉक-इन अवधि समाप्त होने के बाद, आईडीएफसी लिमिटेड आईडीएफसी फर्स्ट बैंक लिमिटेड के प्रमोटर के रूप में बाहर निकल सकता है ।

आईडीएफसी होल्डिंग कंपनी आईडीएफसी फाइनेंसियल होल्डिंग कंपनी का मालिकाना हक़ रखती है। जिसकी वजह से आईडीएफसी का 36.56 फीसदी शेयर बैंक में बनता है। आईडीएफसी का प्रमोटर के रूप से बहार निकलने का स्पस्टीकरण शायद बैंक के साथ रिवर्स मर्जर का कारण बन सकता है। अगर ऐसा होता है तो आईडीएफसी लिमिटेड शेयरधारकों के लिए फायदेमंद होगा और उनके शेयरधारक होने के मूल्य में बढ़ोतरी होगी।

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