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खुद की बुक पब्लिशिंग हाउस शुरू कर हर माह लाखो कमाये, ये है पूरा प्रोसेस

अगर आप बुक पब्लिशिंग हाउस शुरू करने की सोच रहे हैं। तो आपकी सोच बिल्कुल सही है यह आपके लिए एक बेहतरीन स्टार्टअप साबित हो सकता है। जो कम लागत में आपको बेहतरीन मुनाफा दिला कर अच्छा खासा बिजनेस जमाने में मदद कर सकता है।

कैसे शुरुआत करें?

आप अपने पब्लिशिंग हाउस को स्टेप बाय स्टेप कैसे शुरू कर सकते हैं यह पूरी गाइडेंस इस ब्लॉग में दी गई हैः

भारत की सर्वश्रेष्ठ पब्लिशिंग हाउस कंपनीः

नोशन प्रेस पब्लिशिंग, पेंगुइन पब्लिशिंग, इविंसपब पब्लिशिंग, जोबरा पब्लिशिंग,  एस चांद पब्लिशिंग, इन सारे पब्लिशिंग हाउस की वेबसाइट को जाकर गूगल में देखें यहां से आपको मोटा-मोटा बिजनेस प्लान समझ आ जाएगा।

बजटः बुक पब्लिसिंग हाउस शुरुआत- 50000 ₹

समयः फारमेलिटी पूरी करने को- 10- 15 दिन

लो बजट हाउस मंथली इनकमः  50000 ₹ शुरुआत में।

लीगल रजिस्ट्रेशनः

सबसे पहले तो आप अपनी कंपनी का नाम सोचे और उसे रजिस्टर करवाएं। रजिस्टर करवाते समय ध्यान रखें थोड़ा सा खर्चा बचाने के लिए इसे प्रोपराइटरशिप फर्म के स्वरूप में रजिस्टर्ड ना करवाएं। एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से ही शुरू करें। क्योंकि जैसे-जैसे आपका बिजनेस ग्रो करेगा यह आपके लिए एक ब्रांड बनता जाएगा।

कुछ लोगों की सोच होती है कि अभी प्रोपराइटरशिप कंपनी से शुरू करके बाद में इसे प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरफ ले जाएंगे।  लेकिन यह सोच गलत है इससे आपके ब्रांड पर असर पड़ता है। इसे प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरह रजिस्टर करवाएं।

अपनी खुद की वेबसाइट बनायें। जहां पर आपकी बुक पब्लिशिंग हाउस की सारी जानकारी उपलब्ध हो।

गुमास्ता लाइसेंस, जीएसटी रजिस्ट्रेशन, आईएसबीएन रजिस्ट्रेशन, ऑफिस रजिस्ट्रेशन,  ट्रेड लाइसेंस, कॉपीराइट, रजिस्ट्रेशन यह सारी फॉर्मेलिटी जरूर पूरी करें।  अगर आपने एक भी फॉर्मेलिटी पूरी नहीं की तो यह आगे आपकी ग्रोथ में रुकावट बन सकता है। इन सभी में बहुत अधिक खर्चे नहीं आती थोड़े से खर्चे से आप ऐसा कर सकते हैं।

एडवर्टाइजमेंटः

अब आपका लीगल काम और पेपर वर्क पूरा हो गया। आपने एक ऑफिस भी तय कर लिया और वेबसाइट भी बना लिया अब बारी आती है एडवर्टाइजमेंट की। एडवर्टाइजमेंट के लिए अभी सबसे बड़ा सरल साधन है गूगल एडवर्ड।  गूगल के माध्यम से आप ऑनलाइन ऐड चला सकते हैं।  बहुत ही छोटी सी लागत में ₹ 500 जैसे मिनिमम लागत में आप 1 से 2 दिन के लिए या कभी-कभी हफ्ते भर के लिए अपनी वेबसाइट का ऐड चला सकते हैं।

इस तरह से ऐड चलाने से लोग आपकी नई कंपनी के बारे में जानेंगे और बुक राइटर आपकी कंपनी को कांटेक्ट करेंगे।

बिजनेस प्लानः

अपना बिजनेस प्लान तैयार रखे। कितनी लागत में आप किस तरह की बुक पब्लिश करने वाले हैं। आपको प्रिंटिंग में कितनी लागत आएगी। आपको उस किताब की मार्केटिंग में कितनी लागत आएगी।  कवर पेज डिजाइन करने में, ग्राफिक डिजाइन करने में, प्रूफ रीडिंग करने में, एडिटिंग करने में, इन सारी चीजों में कितने खर्चे आएंगे।  यह सारे प्लान आप पेपर पर पूरी तरह से तैयार करें।

ताकि जब आपको आपका पहला राइटर कांटेक्ट करें। तो आपके पास आपका पूरा बिजनेस प्लान तैयार हो।  ताकि आप बिना रुके उसे पूरा बिजनेस प्लान समझा सके। समझा सके कि वह अपनी बुक को आपकी सहायता से कैसे पूरे व्यवस्थित तरीके से पब्लिक करवा सकता है।  क्योंकि आपकी बात ही उस राइटर को आपकी कंपनी से डील पक्का करने में मदद करेगी।

दुसरी कम्पनी से टाई अपः

अगर आप अपना खुद का प्रिंटिंग प्लांट नहीं डालना चाहते।  तो एक अच्छी ब्रांडेड प्रिंटिंग प्लांट कंपनी से टाईअप करें।  अगर आप खुद से ग्राफिक डिजाइन करने और कवर पेज डिजाइन करने में महारत हासिल नहीं है या आपके पास ऐसे वर्कर नहीं है जो आपके लिए काम कर सके तो इसके लिए भी आप दूसरी कंपनी से कांटेक्ट कर सकते हैं।

ISBN नंबरः

ISBN नंबर पहले से खरीद कर रखें।  अब इसके लिए आपको अपनी कंपनी को आईएसबीएन कंपनी से रजिस्टर करवाना होता है। वहां पर आप इन्से आईएसबीएन नंबर खरीद सकते हैं।  यह एसबीएन नंबर ई बुक प्रिंटिंग के लिए और हार्ड कवर प्रिंटिंग के लिए अलग-अलग आते हैं।  याद रखें आईएसबीएन नंबर लेने के बाद अपनी कंपनी के नाम से उसका कॉपीराइट रजिस्ट्रेशन भी जरूर करवाएं।  अगर आपने कॉपीराइट रजिस्ट्रेशन नहीं करवाया तो यह आपको आपके लिए आगे समस्या खड़ी कर सकती है।

ग्राहकों का मेनेजमेंटः

जैसे ही आपके पास किसी बुक राइटर का कॉल या ईमेल आता है। तुरंत उनसे पूरी तैयारी के साथ रिप्लाई करें। उन्हें अपना पूरा प्लान समझाए। पूरा प्लान समझाने के बाद बिल्कुल व्यवस्थित तरीके से उनके बुक की कंटेंट कि एडिटर और प्रूफ्रीडर से जांच करवाएं, ताकि कंटेंट में कोई मात्रा, या लिखावट से जुड़ी गलतियां ना हो।

ऐसा कराने के बाद उस बुक का कवर पेज डिजाइन करें। कवर पेज डिजाइन करने के बाद ग्राफिक डिजाइन करें। सब कुछ तय होने के बाद उसकी कीमत तय करें। हार्ड कवर,  ई बुक, नॉर्मल पेपर कवर इन सब के लिए अलग-अलग कीमत तय कर ले। अपनी पूरी प्लान तैयार करने के बाद आप आईएसबीएन नंबर के लिए अप्लाई करें।

आईएसबीएन नंबर आपकी बुक की आइडेंटिटी होगी। यह सब कुछ तय होने के बाद आप इन सारी जानकारी के साथ अपनी बुक के कंटेंट को ऑनलाइन किंडल ई बुक जैसी वेबसाइट पर डाल सकते हैं। और हार्ड कवर प्रिंटिंग के लिए किसी भी हार्ड कवर प्लांट को दे दे।

कॉपीराइटः

अब बूक को कॉपीराइट के लिए भेज दें।  भारती सरकारी संस्थान के द्वारा आपको कॉपीराइट सर्टिफिकेट प्रोवाइड करवाया जाता है। जो आपकी पब्लिशिंग हाउस और आपकी और राईटर का उस बुक पर अधिकार दिखाता है।  इस तरह से आपका कंटेंट सुरक्षित रहता है। आगे उसमें कोई भी कंटेंट चोरी जैसी समस्या नहीं आती।

बुक मार्केटिंगः

इन 7 स्टेप को पार करने से आप अपने पहले राइटर की बुक पब्लिश करा कर एक एक्सपीरियंस तो प्राप्त कर लेंगे। इसके बाद बारी आती है बुक की बिकने की। इसके लिए आपको सोशल मीडिया नेटवर्किंग साइट्स और गूगल ऐडसेंस, यूट्यूब इत्यादि के जरिए ज्यादा से ज्यादा बुक की मार्केटिंग करनी होगी। इसके लिए आप अपने राइटर से उसका अलग से चार्ज भी ले सकते हैं।  फिजिकल डिस्ट्रिब्यूशन के लिए लोकल मार्केट में बुक शॉप, स्टेशनरी शॉप, लाइब्रेरी इत्यादि में जाकर उसको डिस्प्ले में रखवा दे।  जितनी ज्यादा मार्केटिंग होगी आपकी बुक बिकेगी और आपके राइटर आपका दोनों का साथ में फायदा होगा।

रायल्टी डिस्ट्रिब्युशनः

अब यह समझने वाली बात है कि एक ग्राहक ही दूसरा ग्राहक लाता है। इसके लिए बुक की बिक्री का पूरा डाटा आपके पास ही होगा। आपको चाहिए कि समय-समय पर अपने राइटर को उसकी बुक की बिक्री के अनुसार रॉयल्टी देते रहें। जितना ज्यादा आपके काम में ट्रांसपेरेंसी दिखेगी एक ग्राहक दूसरे ग्राहक को आपके पास ही काम कराने के लिए प्रेरित करेगा। इस तरह से आपका मार्केट एरिया, आपका ब्रांड बढ़ेगा और आपका बिजनेस भी धीरे धीरे बड़ता जाएगा।

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