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यदि आप भी हैं नाक के रोगों से परेशान , अपनाये यह घरेलू उपाय

अक्सर नाक के बीच की श्लैष्मिक झिल्ली में घाव व उसमें बदबूदार स्त्राव निकलता है। या कभी-कभी नाक की हड्डी में भी घाव हो जाता है इसे पीनस रोग कहते हैं। जुकाम हो जाने पर नाक से पानी बहने लगता है। नाक खुरचने, नाक में कोई वस्तु चली जाने अथवा नकसीर आने पर नाक से खून बहने लगता है। नाक साफ न रहने से श्वा श्वास लेने में कठिनाई होने लगती है। नाक में कई बार फुन्सी भी हो जाती है जिसका सावधानीपूर्वक उपचार कराना चाहिये।

नाक में फुँसी हो तो छोटी इलायची का चूर्ण पीसकर लगाने पर, वह पकने से पहले ही सूख जायेगी।
नाक में फुँसी हो जाये तो बरगद का दूध, फुरेरी बनाकर , दूध मिला कर फुँसी पर लगायें। फुँसी सूख कर ठीक हो जायेगी।
नाक के अन्दर, बाहर फुन्सियाँ निकलने पर बेर सूँघने और उसका गूदा लगाना चाहिये।
नाक और गले के रोग होने पर गाजर और पालक का रस प्रत्येक 250 ग्राम मिलाकर पीने से लाभ होता है।
नाक के दर्द हो तो तुलसी के सूखे या गीले पत्तों को मसल कर सूँघने से लाभ होता है।
नाक में खुश्की होने पर घी सूँघें और रूमाल पानी में भिगोकर सिर पर रखने से लाभ होता है।
तुलसी के पत्तों का रस या पिसे हुए सूखे पत्ते सूँघने से नाक की दुर्गन्ध दूर होती है ।

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