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पेट्रोल पर जीएसटी संग वैट भी

पुरे देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर मोदी सरकार को बहुत ही कड़ी आलोचना झेलनी पड़ रही है। GST परिषद पेट्रोल और डीजल को वस्तु एवं सेवा कर (GST) के दायरे में लाने के लिए राज्यों के बीच पूरी तरह सहमति बनाने की लगातार कोशिशें कर रही है। परिषद राज्यों को पूरी तरह यह आश्वस्त कर रही है कि ऐसा होने से उनके राजस्व पर किसी भी तरह का कोई नुकसान नहीं होगा। परिषद का प्रस्ताव यह है कि पेट्रोलियम पर तकरीबन 28 फीसदी GST लगाया जाए।

राज्यों में सहमति बनाने की कोशिश

केंद्र सरकार पूरी तरह पेट्रोलियम को GST में लाने को इच्छुक है और उसे GST से ऊपर उत्पाद शुल्क लगाने की अनुमति भी मिल सकती है। बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने यह कहा है कि वर्तमान में राज्यों के कुल राजस्व में तकरीबन 40 फीसदी हिस्सेदारी पेट्रोलियम उत्पादों की है। ऐसे में GST दर से ऊपर कर लगाने या राज्यों और केंद्र को अतिरिक्त कर लगाने की आजादी राज्यों को अवश्य मिलनी चाहिए।’ हालांकि राज्य पेट्रेालियम को GST में शामिल करने के पक्ष में कतई नहीं हैं क्योंकि उनके कर राजस्व में इसकी हिस्सेदारी तकरीबन 40 फीसदी है। ऐसे में इस पर वैट या GST के अतिरिक्त अन्य कर लगाने की अनुमति मिलने से राज्यों को अवश्य ही राजी किया जा सकता है।

कंपनियों के मुनाफे पर पड़ता है असर

आपको बता दे की अभी विभिन्न राज्यों में पेट्रोल-डीजल पर अलग-अलग कर लगता है। महाराष्ट्र में पेट्रोल पर वैट की दर सर्वाधिक 43.74 फीसदी है, वहीं डीजल पर तकरीबन 26.14 फीसदी वैट लगता है। दूसरी ओर निर्धारित केंद्रीय उत्पाद शुल्क भी इसपर लगाया जाता है, जो कीमत घटने या बढऩे पर कम या ज्यादा नहीं होता है। क्रूड ऑयल, हाई स्पीड डीजल, पेट्रोल, प्राकृतिक गैस और विमानन ईंधन (ATF) पूरी तरह GST के दायरे से बाहर है। विनिर्मित वस्तुओं पर GST के तहत कर लगता है लेकिन पेट्रोलियम उत्पादों पर वैट लगाया जाता है, जिससे कंपनियां इनपुट टैक्स क्रेडिट कतई नहीं ले पाती हैं और इसकी वजह से उनका मुनाफा भी बहुत अधिक प्रभावित होता है। एक अधिकारी ने कहा, ‘अगर राज्यों को GST दर से अतिरिक्त कर लगाने की अनुमति मिलती है तो इससे पेट्रेालियम पर राज्यों को सहमत करना पूरी तरह आसान हो सकता है।’

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