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चालू वित्त वर्ष में खर्च में 2 लाख करोड़ रुपये की कटौती की संभावना: रिपोर्ट

चल रहे वित्त वर्ष के लिए खर्च में 2 लाख करोड़ रुपये की कटौती करने की संभावना जताई गई है, क्योंकि यह हाल के वर्षों में कर की सबसे बड़ी कमी में से एक है।

अगर सरकार खर्चों में कटौती करती है तोएशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, जो कि निजी निवेश की कमी के कारण, छह वर्षों में अपनी सबसे धीमी गति से बढ़ रही है को और नुक़सान झेलना पड़ सकता है।

“लेकिन लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये की राजस्व कमी के साथ, सरकार के पास स्वीकार्य सीमा के भीतर अपने घाटे को रखना बहुत मुश्किल हैं,” एक अधिकारी ने बताया जो अपना नाम सांझा नहीं करना चाहता था।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सरकार ने नवंबर तक 27.86 लाख करोड़ रुपये के कुल व्यय लक्ष्य का लगभग 65% खर्च किया है, लेकिन अक्टूबर और नवंबर में खर्च करने की गति कम कर दी गई। वर्ष के लिए खर्च किए गए कुल स्पेंडिंग में दो लाख करोड़ रुपये की कटौती लगभग 7 प्रतिशत होगी।

अक्टूबर और नवंबर में, सरकारी खर्च में 1.6 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई, सितंबर में लगभग 3.1 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए। वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से शुरू होता है और 31 मार्च को समाप्त होता है।

मांग में कमी और अर्थव्यवस्था में कमजोर कॉर्पोरेट आय वृद्धि के कारण यह वर्ष कर संग्रह में पिछड़ गया। जब निजी निवेश इतना धीमा हो गया है, तो यह निश्चित रूप से विकास को और नीचे ले जाएगा, एलएंडटी फाइनेंशियल के मुख्य अर्थशास्त्री रूपा रेगे नितुसुरे ने कहा।

फरवरी 2019 से केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में 135 आधार अंकों की कटौती के बावजूद, जुलाई-सितंबर में भारत की आर्थिक वृद्धि लगातार छह तिमाहायों में 4.5 प्रतिशत तक धीमी हो गई।

अब, भारतीय रिजर्व बैंक भी महंगाई बढ़नेको ले कर अधिक चिंतित है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा इस साल की शुरुआत में घोषित किए गए औचक कॉर्पोरेट टैक्स रेट में भी अर्थव्यवस्था में निजी निवेश को बढ़ावा नहीं मिला।

सरकार ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में संशोधित राजकोषीय घाटे से मेल करने के लिए सरकार को वर्तमान वर्ष के लिए 300 बिलियन से 500 बिलियन रुपये की अतिरिक्त उधारी की घोषणा करनी पड़ सकती है।

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