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अर्थव्यवस्था की सुस्त वृद्धि पर चिंता, RBI गवर्नर से मिले कई अर्थशाष्त्री

पिछली तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था सिर्फ 6.6 फीसदी की दर से बढ़ी है, जो पिछले साल की अन्य तिमाहियों की अपेक्षा काफी कम है। कई प्रमुख अर्थशास्त्रियों ने इस पर चिंता व्यक्त करते हुए रिजर्व बैंक के गवर्नर से मिलकर जरूरी कदम उठाने का अनुरोध किया है।
कई इकोनॉमिस्ट ने रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास से मुलाकात कर कहा है कि ऐसी मौद्रिक नीति लानी होगी जिससे अर्थव्यवस्था की रफ्तार में फिर से तेजी आए।

4 अप्रैल को रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति कमिटी की बैठक होगी, जिसमें मौद्रिक नीति को अंतिम रूप दिया जाएगा। गवर्नर शक्तिकांत दास ने अर्थशास्त्र‍ियों से मुलाकात की है और उनकी राय को सुना है। ज्यादार इकोनॉमिस्ट चाहते है कि रिजर्व बैंक फिर से रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट यानी चौथाई फीसदी की कटौती करे और उसे 6 फीसदी तक ले आए। रिजर्व बैंक अपनी पिछली मौद्रिक नीति समीक्षा में चौथाई फीसदी की कटौती कर चुका है।

कमजोर उपभोक्ता मांग और कम निवेश को इस कम वृद्धि दर की वजह माना जा रहा है। अर्थव्यवस्था की रफ्तार घटने से टैक्स कलेक्शन लक्ष्य से कम हो सकता है और सरकारी खर्च में कटौती आ सकती है।  इकोनॉमिस्ट ने कहा कि अर्थव्यवस्था की रफ्तार सुस्त पड़ने से भारत के निर्यात पर असर पड़ सकता है, जिसकी रफ्तार पहले से सुस्त है। इकोनॉमिस्ट ने कहा कि अगर मॉनसून की बारिश अच्छी नहीं हुई तो सितंबर के बाद महंगाई बढ़ सकती है।

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