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सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यमों के बिना देश विकसित नहीं हो सकता

सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम(एमएसई) मंत्रालय ने आज नई दिल्‍ली में राष्‍ट्रीय अनुसूचित जाति/जनजाति केन्‍द्र योजना के तहत एमएसएमई के बारे में क्षेत्रीय सम्‍मेलन का आयोजन किया। एमएसएमई मंत्रालय में राज्‍यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) गिरिराज सिंह ने अपने उद्घाटन सम्‍बोधन में लघु उद्यमियों के वित्‍तीय समावेश की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि इन उद्यमों के बिना देश विकसित नहीं हो सकता। एनपीए और बुरे ऋणों के बारे में बैंकिंग क्षेत्र की चिंताओं के बारे में उन्‍होंने बताया कि जहां पर बैंकों से जरूरत आधारित वित्‍त पोषण प्राप्‍त होता है, वहां बैंकों की रिकवरी 99 प्रतिशत से अधिक है। उन्‍होंने बैंकों से सरकार की नीतियों और वित्‍तीय गारंटी के अनुसार अपनी प्राथमिकताएं निर्धारित करने तथा युवाओं और छोटे उद्यमियों को ऋण उपलब्‍ध कराने का अनुरोध किया।

गिरिराज सिंह ने कहा कि सरकार अनुसूचित जाति/जनजा‍ति के उद्यमियों को उद्योग में उनके समकक्षों के स्‍तर पर लाने की इच्‍छु‍क है। सरकार ने केवल उन्‍हीं के लिए वित्‍तीय योजनाएं चलाई हैं। एमएसएमई क्षेत्र के लिए प्रधानमंत्री द्वारा 2 नवम्‍बर, 2018 को घोषित सरकार की 12 पहलों के बारे में उन्‍होंने एमएसएमई से 59 मिनट लोन सेंक्‍शन पोर्टल का पूरा लाभ उठाने के लिए कहा। उन्‍होंने कहा हालांकि संसाधन सीमित हैं, लेकिन सरकार ने पिछले चार वर्षों के दौरान एमएसएमई क्षेत्र के विकास के लिए बहुत कार्य किया है। एमएसएमई सचिव डॉक्‍टर अरुण कुमार पांडा ने कहा की एमएसएमई को प्रतिस्‍पर्धी बनाने के लिए कम लागत पूंजी की समय पर उपलब्‍धता, प्रौद्योगिकी उन्‍नयन, बाजार पहुंच और कुशल कामगार इस क्षेत्र के विकास के लिए प्रमुख घटक हैं। उन्‍होंने मंत्रालय की विभिन्‍न योजनाओं का लाभ उठाने के लिए कहा।

इस सम्‍मेलन का मुख्‍य केन्‍द्र बिन्‍दू अनुसूचित जाति/जनजातियों के उद्यमियों के सामने आ रही वित्‍तीय चुनौतियों का खुलासा करना और इन्‍हें दूर करने के लिए सरकार तथा अन्‍य हितधारकों द्वारा उठाये गए विभिन्‍न कदमों के बारे में जानकारी देना था। सम्‍मेलन के भागीदारों के लिए बैंकों और वित्‍तीय संस्‍थानों द्वारा एक ऋण और जागरूकता शिविर का भी आयोजन किया गया।

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