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अवसाद में मादक पदार्थो का सेवन हो सकता है और भी घातक

अवसाद के दौरान शराब व अन्य मादक पदार्थो का ज्यादा सेवन समस्या को बद्तर बना देता है। अवसादग्रस्त लोग अपनी बीमारी के लक्षणों से निजात पाने के लिए मादक पदार्थो का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन मादक पदार्थ इस बिमारी में ईंधन का काम करते है और यह रोगी की हालत को और भी ज्यादा खराब कर देता है। मादक पदार्थ पर निर्भरता बढ़ने की नौबत आ जाती है। ऐसी स्थिति में अवसाद से पीड़ित लोगों में आत्महत्या की प्रवृत्ति में इजाफा हो सकता है। ऐसे लोगों के स्वस्थ होने में काफी वक्त लग जाता है।

मादक पदार्थो का सेवन चिकित्सकों को समस्या की जड़ तक पहुंचने में दिक्कत पैदा करता है। हमारे शरीर में स्वाभाविक तौर पर पाया जाने वाला न्यूरोट्रांसमीटर (डोपामिन) होता है, जो पूरे मस्तिष्क व शरीर में रिसेप्टरों से जुड़ा होता है और दर्द पर नियंत्रण करने, हॉर्मोन का स्रवन करने तथा व्यक्ति को अच्छा महसूस कराने में अपनी भूमिका निभाता है।जब मादक पदार्थो का लंबे वक्त तक इस्तेमाल किया जाता है और मस्तिष्क ज्यादा से ज्यादा मात्रा में डोपामिन का स्रवन करता है, तो अवसाद की समस्या और गंभीर हो जाती है ।

अवसाद के मूल लक्षणों में एक खुद को अच्छा महसूस न करना है। अवसादग्रस्त लोग थका-थका महसूस करते हैं और ज्यादा से ज्यादा सोते हैं और उन का हाजमा भी अक्सर खराब रहता है, जिसके कारण वजन में अवांछित कमी आती है। साथ ही उनके मन में हीन भावना, निराशा तथा खुद को अकेला महसूस करने लगते हैं

अवसाद तथा अन्य मानसिक समस्याओं पर खुलकर बात करने से समस्या की पहचान करने तथा उनका इलाज करने में मदद मिलती है।लोगों को चिकित्सकों से अपनी समस्याओं पर खुलकर बात करनी चाहिए। शुरुआती दौर में चिकित्सा आसान है और दवा की जरूरत नहीं होती और साधारण काउंसेलिंग से इसका इलाज संभव है।

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