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किसी को परखने का पैमाना नहीं हैं “भाषा”

विवेक ओबरॉय ने कहा है कि भाषा किसी व्यक्ति को परखने का पैमाना नहीं होना चहिए। ट्विटर पर यह पूछे जाने पर कि क्या इंग्लिश बोलना किसी एक व्यक्ति को दूसरों से बेहतर बनाता है? विवेक ने कहा, “इस साल दक्षिण भारत और छह भाषाओं में फिल्म करने के बाद मुझे यह एहसास हुआ कि हमें यह धारणा बदलनी चाहिए। भाषा किसी को परखने का पैमाना नहीं होना चाहिए।”
एक अभिनेता के तौर पर विवेक ओबरॉय आखिरी बार 2016 की फिल्म ‘बैंक चोर’ में नजर आए थे। विवेक अभी फिल्मकार उमंग कुमार और अभिनेत्री हुमा कुरैशी के साथ टीवी शो ‘इंडिया बेस्ट ड्रामेबाज’ में बतौर जज काम कर रहे हैं। बता दे, इन दिनों विवेक का साउथ की फिल्मो में काफी बोल-बाला हैं. पिछले दिनों अजित के साथ विवेगम करने के बाद, अब विवेक एक मलयालम और कन्नडा फिल्म करने जा रहे हैं. मलयालम फिल्म का नाम लूसिफ़ेर हैं, और इस फिल्म में मोहनलाल भी काम कर रहे हैं. कन्नडा फिल्म का नाम रुस्थुम हैं.
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