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भारतीय अर्थव्यवस्था एक हाथी की तरह है, जो अब दौड़ रहा है: IMF

IMF ने आज यह कहा कि अगले कुछ दशकों तक वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था वृद्धि का मुख्य स्रोत बनी रहेगी। दुनिया के लिए इसका वही योगदान होगा जो कि अब तक चीन का रहा है। आपको बता दे की वैश्विक संस्थान ने देश को अधिक संरचनात्मक सुधारों के लिए कदम उठाने को कहा।

भारत के लिए IMF के मिशन प्रमुख रानिल सलगादो ने कहा, ‘‘भारत अब क्रय शक्ति समानता उपायों में वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि में तकरीबन 15 फीसदी का योगदान कर रहा है जो उल्लेखनीय है।’’ यह चीन और अमेरिका के बाद दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता है। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन क्रयशक्ति समानता सिद्धांत के संदर्भ में वैश्विक वृद्धि में इसका योगदान लगभग 15 फीसदी है। हालांकि, इसका व्यापार स्तर उतना अधिक व्यापक नहीं है जितना चीन का है।’’ सलगादो के मुताबिक IMF भारत को वैश्विक वृद्धि के दीर्घकालीन स्रोत के रूप में देखता है।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत की कामकाजी आयु वाली आबादी घटनी शुरू हो उससे पहले उसके पास तकरीबन तीन दशक का समय है। इसीलिए यह लंबा समय है। यह भारत के लिए एशिया में बेहतर अवसर है क्योंकि केवल कुछ अन्य एशियाई देशों में ही यह स्थिति है।’’ सलगादो ने कहा, ‘‘अगले तीन दशकों के लिए भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए वृद्धि का महत्वपूर्ण स्रोत है और यह इससे भी अधिक समय तक बना रह सकता है।’’ IMF के कार्यकारी बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में निवेश में बढ़ोतरी तथा मजबूत निजी खपत के आधार भारत की आर्थिक वृद्धि दर 2018-19 में तकरीबन 7.3 फीसदी तथा 2019-20 में लगभग 7.5 फीसदी रहने का अनुमान जताया है।

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